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मैं सतत प्रसन्न हू1 प्यार इसका राज और ज्ञान इसका संबल है

Author : ओम प्रकाश नेमानी

Binding : Paperback

Publication Date : 2018

199.00

मैं सतत प्रसन्न हू1 प्यार इसका राज और ज्ञान इसका संबल है

199.00

मनुष्य में अद्भुत शक्ति है, वह रो भी सकता है और हँस भी सकता हैI परिस्थितियाँ तो निर्माण होती हैं, उनका प्रभाव पड़ता है परंतु उनका कितना प्रभाव उस पर पड़े यह मनुष्य स्वयं नियंत्रित कर सकता हैI सतत प्रसन्न रहना एक कला हैI यह कला हर व्यक्ति को आती है, परंतु हम विस्मित हो गए हैंI हम अपना स्वरूप भूल गए हैंI
यह पुस्तक आपको अपने मूल रूप में स्थापित करने का प्रयास है; जिसके द्वारा आप सतत प्रसन्न रह सकते हैंI कोई भी परिस्थिति आपको विचलित नहीं कर सकती है; यह अहसास आपको सदैव रहे; यही मेरी कामना हैI मेरी अन्य पुस्तकें अंग्रेजी में ‘हैप्पीनेस 24/7’, ‘कृष्ण दी सुपर कॉन्शसनेस’ और हिंदी में ‘दादी के बोल’ भी आप पढ़ें और लाभान्वित हों; यह अपेक्षा रखते हुए आपके सहयोग के लिए धन्यवादI

About Author

Om Prakash Nemani was born on 5th September 1936, in Kanpur and is a graduate in commerce. He graduated from Lucknow University. He was awarded Gold Medal and Chancellor’s Medal by Shri V.V. Giri. Former President of India. He started his career as a Probationary officer in State Bank of India. He left the job after five years of service and started his own manufacturing unit. He is widely travelled and has vast experience in various fields of business.
Since the last 3 years, he has come in touch with Sadhguru Rameshji and is moving ahead on his journey on the path of spirituality. Nemani considers him a common man just like you. He is keen and eager to explore and unlock the secrets of constant happiness.
He can be reached via his Facebook page or via email at ompnem@gmail.com.

Dimensions 5.5 × 8.5 in
LAMINATION

Gloss

BINDING

Paperback

PAGE COUNT

180

ISBN

9789388573689

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